आज हरियाणा स्थापना के 50 साल पूरे हो रहे हैं। इन 50 सालों में हरियाणा ने कई उतार - चढ़ाव देखे हैं। आगे बढ़ने के तो कई मामलों में पीछे रह जाने के। जिनकी चर्चा हम आगे करेंगे। आज का यह दिन हरियाणवी होने का गर्व करने व हरियाणा को और आगे ले जाने का दिन है। ख़ुशी मनाने का दिन है। दिन इस बात का भी मनन करने का है कि हम हरियाणा को और बेहतर कैसे बना सकते हैं। उस स्थिति में जब कि हरियाणा ने वैश्विक स्तर पर लगभग प्रत्येक क्षेत्र में अव्वल रहने की अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी है। फिर चाहे वह क्षेत्र खेल का हो, शिक्षा का हो, विज्ञानं का हो, अंतरिक्ष का हो, उद्योग का हो। सभी में हरियाणा ने देश का परचम फहराया है। अपनी शुरुआत से ही हरियाणा मेहनतकश लोगों का प्रतिनिधित्व करता आया है। कृषि इस क्षेत्र की रीढ़ है तो कल कारखाने हरियाणा के विकास का चमकता हुआ चेहरा है। ऐसे में इस हरियाणा पर किसको गर्व नहीं होगा और कोई क्यों हरियाणा में नहीं रहना चाहेगा ? यहां के गबरू जवानों और पहलवानों की दुनिया भर में मिसाल दी जाती है। "देसां म्ह देस हरियाणा - जित दूध -दही का खाणा" इस प्रदेश की पहचान है। देश की सीमा पर खड़ा लगभग हर दसवां जवान हरियाणा से है। हरियाणा का प्रमुख शहर गुरुग्राम आज अपने विकास और दुनियाभर की सभी प्रमुख आईटी कंपनियों का मुख्यालय होने के कारण लघु भारत का रूप ले चूका है। गुरुग्राम ही वह शहर है जहाँ दिल्ली के बाद मेट्रो ने सबसे पहले दस्तक दी है। यहाँ की लाइफस्टाइल और विकास की बन रही योजनाएं प्रदेश के अन्य सभी छोटे-बड़े शहरों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही है। हरियाणा कई वर्षों बाद आज इस बात पर गर्व कर सकता है कि उसे भारतीय जनता पार्टी की टिकाऊ सरकार मिली है। ऐसा प्रदेश की जनता का भारतीय जनता पार्टी की रीति-नीति में अपने भरोसे के निवेश के चलते हो पाया है। हरियाणा आज आयाराम गयाराम की राजनीति को अलविदा कह चूका है जो कभी इस प्रदेश की राजनीति की पहचान हो गई थी। यहाँ यह कहना भी जरुरी हो जाता है कि कृषि प्रधान प्रदेश होने और सिर्फ दूध और बासमती चावल ही पैदा नहीं करता बल्कि देश में बनने वाली हर दूसरी कार हरियाणा में बनती है। देश का हर तीसरा टू व्हीलर और हर दूसरी क्रेन हरियाणा में बनती है। गुरुग्राम की आईटी, फरीदाबाद की लाइट इंजीनियरिंग, पानीपत के हैंडलूम, कम्बल, अम्बाला की साइंस उपकरण इंडस्ट्री और करनाल की डेयरी इंडस्ट्री इस प्रदेश की प्रमुख पहचान बताती है। इससे आगे थोड़ा सा हम सोचे तो "देसां म्ह देस हरियाणा - जित दूध दही का खाणा" जैसी पुरानी कहावत को बदलकर हरियाणा आज "देसां म्ह देस हरियाणा - जहाँ कदम-कदम पर कारखाना" में तब्दील हो रहा है। जिसके चलते आज दुनिया भर के देश हरियाणा में करोड़ों-अरबों रूपये का निवेश करने आ रहे हैं। जिससे हरियाणा देश का सबसे विकसित प्रदेश बन गया है। यही कारण है कि कृषि, खेल, आईटी, इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक निवेश में नई ऊंचाइयों को छूकर 50 साल में हरियाणा जवान हो गया है। खेल में क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय पहचान और एनसीआर में आईटी कंपनियों की विकास की रफ़्तार से प्रदेश ने नई उड़ान भरी है। कृषि डेयरी क्षेत्र की उपलब्धियां और राज्य में निवेशकों के रूझान ने नई ऊर्जा का संचार किया है। हरियाणा के पास आज गर्व करने के लिए सब कुछ है। जिनका नाम और उल्लेख करना शुरू करे तो लिखने को पन्ने कम पड़ जाएंगे। यह ऋषि मुनियों का प्रदेश है, पानीपत का युद्ध इसी प्रदेश में हुआ तो गीता का ज्ञान भगवान् श्री कृष्ण ने अर्जुन को कुरुक्षेत्र में दिया। महर्षि ऋषि की तपोभूमि इसी प्रदेश के नारनौल क्षेत्र में स्थित ढोसी के पहाड़ पर है। लेकिन इन सब उपलब्धियों पर गर्व करने के बावज़ूद हम जब महिलाओं और बच्चियों की स्थिति की ओर देखते है तो हमें इस क्षेत्र में बहुत अधिक काम करने की जरुरत है। फिर चाहे मामला उनको जन्म देने का हो, शिक्षा का हो, स्वास्थ्य का हो या उनके जीवन यापन का। हमें सभी क्षेत्रों में अधिक से अधिक काम करने की जरुरत है। मेरा यह स्पष्ट मानना है कि कोई भी देश हो या प्रदेश बिना आधी आबादी को साथ लिए आगे नहीं बढ़ सकता। ऐसे में आज एक नवंबर हरियाणा का दिन है। दिवस है। जिसे मनाने के लिए देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी सहित अन्य प्रदेशों के मुख्यमंत्री और भी बहुत अतिथि हरियाणा के गुरुग्राम में आ रहे हैं। इस अवसर पर सभी का स्वागत है, सत्कार है।
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Monday, 31 October 2016
Saturday, 1 October 2016
फैंसला आपको करना है कि आप गाँधी जी के किस विचार के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं ?
आज राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की 147 वीं जयंती है। राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी को हम बापू के नाम से भी जानते है और संबोधित भी करते हैं। गाँधी जी ने देश को आज़ाद कराने से लेकर आगे बढ़ने का विचार हमें दिया था। जो आज भी प्रासंगिक है। गाँधी जी का इस बारे में कोई एक विचार नहीं है। उन्होंने कई ऐसे विचार दिए जिनमें से किसी एक पर भी अमल कर हम काम करना शुरू कर दें तो वह हमें देश सेवा के लिए आगे ले जाता है। गाँधी जी ने हमें अहिंसा, शराब और किसी भी नशाखोरी से दूर रहना, स्वच्छता रखना जीवन में और अपने आसपास, स्वदेशी अपनाना, खादी पहनना, इत्यादि .... इत्यादि। इन सभी विचारों में से कोई एक विचार जिसके सबसे नज़दीक आप अपने आप को रखते है या पाते है बस उसी पर काम करना शुरू कर दें। यही देश की और समाज की सबसे बड़ी सेवा होगी। सही मायने में तो आज गाँधी जी के हर विचार पर तेजी से काम करने की जरुरत है। ऐसा हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बार-बार कहते हैं। वे यह बात यूँही नहीं कह रहे। वे गाँधी जी के हर विचार को देश के लिए एक विज़न के रूप में देखते हैं। आज जब पर्यटन हमारी बढ़ती इकॉनमी का प्रमुख क्षेत्र बनकर उभरा है तो हमें इसके लिए स्वच्छता के काम को हाथ में लेना होगा। ख़ुशी इस बात की है कि प्रधानमंत्री ने स्वच्छता के प्रति लोगों को जिस प्रकार जोड़ा है और नज़रिया बदलने में सफल हो रहे है उससे स्वच्छता के काम ने जनआंदोलन का रूप ले लिए है। यह सही है कि स्वच्छता का काम किसी समयसीमा में नहीं बांधा जा सकता। यह ताउम्र और लगातार काम की मांग करता है। देश के पढ़े-लिखे नौजवान जितना इस क्षेत्र में काम करेंगे उतना ही यह रोज़गार और स्वरोज़गार का रूप भी लेगा। स्वच्छता या सफाई के काम को किसी एक जाति या समुदाय का काम मानकर नहीं छोड़ सकते। अब इस सोच और नज़रिए का समय और जमाना गया। देश आगे बढ़ गया है। इन दिनों जिस तरह की एक सोच बनी है कि शौचालय का निर्माण करने से हम स्वच्छता और सफाई के उद्देश्य की पूर्ती कर लेंगे। यह गलत है। स्वच्छता से जुड़े जितने भी विषय और क्षेत्र है उन सब पर हमें एक विज़न मानकर काम करना होगा। जिसमें हर हाल में कूड़े का निस्तारण करना सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। हमारे देश में जितने भी छोटे-बड़े प्राकृतिक, ऐतिहासिक और पौराण्विक महत्व के पर्यटन स्थल है उन सब का भ्रमण कर वहां हम साफ़-सफाई की स्थिति का जायजा लेकर इस काम को आगे बढ़ा सकते है। ऐसा कर हम हमारे शहरों को भी साफ़ करने का काम करेंगे। इसमें हम एक काम और अच्छा कर सकते है वह यह कि सफाई के काम को हम पढ़ाई के दौरान पार्टटाइम के रूप में भी कर सकते है। अमेरिका में कॉलेज और विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं अपनी पढाई और जीवनयापन का खर्चा खुद उठाते हैं। क्या हमारे देश के नौजवान ऐसा नहीं कर सकते ? यकीन मानिए जब हम इस सोच के साथ इस काम को करना शुरू करेंगे तो न सिर्फ हम अपनी बेरोज़गारी को भी खत्म करेंगे बल्कि देश के आर्थिक कोष में भी हम अपना योगदान देंगे, जिसकी आज सबसे अधिक जरुरत है। इससे भी आगे बढ़कर यह काम अगर हम कर गए तो यह बदलते और नए भारत का राष्ट्रीय चरित्र भी बन जाएगा, जो जनसामान्य के लिए प्रेरणा का काम करेगा।
इसी प्रकार हम अपने जीवन में किसी भी प्रकार की हिंसा को स्थान न देते हुए गाँधी जी के अहिंसा के विचार को फैला सकते है, बढ़ा सकते है। जनसामान्य को बता सकते है कि गाँधी जी ने बिना हिंसा के देश के लोगों को आज़ादी के लिए एकत्रित कर अंग्रेजों को देश से खदेड़ने में जो सफलता प्राप्त की वैसा कर हम हमारे देश को समाज को हिंसा मुक्त नहीं कर सकते ? बिल्कुल हम ऐसा कर सकते है क्योंकि हिंसा हमारा स्वभाव नहीं है। सर्वधर्म सम्भाव के मार्ग पर चलने वाले लोग है हम। ऐसे ही हम शराब बंदी के क्षेत्र में काम कर सकते हैं। वहीँ स्वरोज़गार अपनाकर हम आत्मनिर्भर बन सकते हैं। फैंसला आपको करना है कि आप अब गाँधी जी के किस विचार के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं ?
Wednesday, 14 September 2016
पर्यटन उद्योग से अब नई पहचान की और आगे बढ़ेगा हरियाणा
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| हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिला के नारनौल स्थित जलमहल आज भी देश-विदेश के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। |
मुख्यमंत्री मनोहर लाल जी ने पर्यटन को उद्योग का दर्जा देकर बदलते और आगे बढ़ते हरियाणा को एक नई ताकत देने का काम किया है। नई दिशा देने का काम किया है। इससे प्रदेश के वे सभी मेले, तीज-त्योहार, जो हमारी आस्था और परम्पराओं से जुड़े हुए हैं अब मुख्यधारा में आ सकेंगे। ऐसे सभी मेले, तीज-त्योहार जो छोटे हो या बड़े या किसी भी समाज के हों उन्हें समूचे हरियाणा के तीज, मेले, त्योहार किस प्रकार बनाए जाएं और उन्हें घरेलु उद्योग से जोड़ा जाएं, उनका प्रचार और प्रसार कैसे किया जाएं, इस सब की जिम्मेदारी प्रदेश के सभी लोगों पर आ गई है। यह किसी एक व्यक्ति का काम नहीं है ना ही किसी एक ही व्यक्ति को मिलने वाला लाभ है। इससे प्रदेश में जहाँ पर्यटन उद्योग का नया माहौल बनेगा वहीं, वह विकास के रास्ते पर और तेजी से आगे बढ़ेगा।
यहां आपके मन में यह सवाल उठ रहा होगा कि यह होगा कैसे ? लोगों को खासकर युवाओं को इस पर्यटन व्यवसाय से कैसे जोड़ा जा सकेगा ? सवाल लाज़मी है और ऐसे सवाल होने भी चाहिए। इसके लिए सबसे पहले प्रदेश के युवाओं को सभी प्राकृतिक, पौराण्विक और पर्यटन महत्व के स्थलों का भ्रमण कर उसकी पूरी जानकारी एकत्रित करनी होगी और ऐसे स्थलों को नए सिरे से किस प्रकार विकसित कर उन्हें उद्योगों का रूप दिया जाए। इसके लिए उन्हें अपना एक विज़न पेपर तैयार कर सरकार से बात करनी होगी। सरकार युवाओं के इस काम का स्वागत करने के लिए तैयार है।
हरियाणा प्रदेश के हर जिले, गांव, ढाणी में ऐसे कई पर्यटन, प्राकृतिक और पौराण्विक महत्व के स्थल हैं जो हमारी आस्था के भी केंद्र हैं, जो हमारे घरेलु पर्यटन स्थल को परिभाषित करते हैं। जिनसे हमारा खान-पान, पहनावा, हमारी एकता-भाईचारा, हमारा रहन-सहन, संस्कृति सब जुड़ा हुआ है। हम इसकी उपेक्षा नहीं कर सकते। हमारे प्रदेश के युवाओं पर पूरे भारत के साथ-साथ विश्व भर के देशों की नज़र है। हमारे यह युवा आज अपनी मेहनत, लगन से हर क्षेत्र में कमाल कर रहे हैं - धमाल कर रहे हैं। खासकर खेलों में तो हमारे यहां के युवाओं ने तहलका मचा रखा है। यहां मैं प्रदेश की आधी आबादी यानी लड़कियों की तारीफ करने से खुद को बिल्कुल भी नहीं रोकूंगा। जो प्रदेश की शान बढ़ाने में बराबर से लगी हुई हैं। चाहे क्षेत्र अंतरिक्ष का हो या जमीन का या युद्ध का, जिसके कारण दक्षिण हरियाणा को तो सैनिकों की नर्सरी तक कहा जाता है। यह हमारे हरियाणा का कमाल है। हरियाणा में जिस प्रकार पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया गया है उसमें मैं यहां के गबरू जवानों की भी चर्चा करना जरुरी समझता हूँ। हमें ऐसे गबरू जवानों की ब्रांडिंग को पर्यटन व्यवसाय से जोड़ना चाहिए। पूरा देश आज यह जानना चाहता है कि हरियाणा की मिट्टी में ऐसी क्या खास बात है जिससे यहां के युवाओं की गबरू जवानों की इमेज बन गई है। जो अन्य प्रदेशों में देखने को नहीं मिलती। निश्चित रूप से यह हरियाणा के देशी खान-पान का कमाल है। हम प्रदेश के खान-पान, पहनावे, नृत्य-संगीत, रागनी, लोक कलाकारों को अपने प्रयासों से विश्वभर में प्रचारित और प्रसारित कर हरियाणा के पर्यटन उद्योग को मज़बूती दे सकते है। मैं विश्वास करता हूँ कि आप और हम यह जरूर करेंगे।
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