प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के देश में नोटबंदी
के फैंसले के बाद बैंकों के बाहर पैसे निकलवाने के लिए घंटो कतार में खड़े लोगों की
अधीरता, बेसब्री को विपक्ष के लोग जिस प्रकार हवा दे रहे हैं, उसे लोगों को ही समझने की आज सबसे अधिक जरुरत है। जरुरत इसलिए कि उनकी यह स्थिति
क्योंकर बनी? कौन है इसका जिम्मेदार? समय आ गया है ऐसे लोगों को, राजनैतिक दलों को, सरकारों को जानने का, समझने का, पहचानने का। जिन्होंने प्रधानमंत्री के एक फैंसले से पूरे भारत की अधीरता, बेसब्री और तात्कालिकता को सामने ला दिया। उजागर कर दिया। यह देश के लोगों की कमजोरी
है। जिसे देश के लोगों को ही समझने की सबसे अधिक जरुरत है। आखिर ऐसी व्यवस्था कैसे
विकसित हो गई, जिसमें बहुत से लोगों की जाने
चली जाने की बात कही जा रही है। निश्चित रूप से यह सोचने, समझने, जानने का समय है कि कैसे एक
राजनैतिक दल कांग्रेस जिसने देश पर छह दशक तक राज कर देश में जमाखोरी, कालाबाजारी, भ्रष्टाचार कर कालाधन जमा
करने की प्रवृति को बढ़ावा देते हुए अपने काम से, व्यवहार से, नीतियों से, कार्यक्रमों से देश के लोगों को भ्रष्ट बना दिया। रिश्वतखोर बना दिया। जमाखोर बना
दिया। कालाबाजारी करने वाला बना दिया। उससे लोगों चरित्र, मानसिकता, स्वभाव और काम करने व फैंसला
लेने तक को प्रभावित कर दिया। कोई भी काम ईमानदारी से करना जैसे काम न होने की गारंटी
बन गया। हम बेईमान और धूर्त होते चले गए। हर काम में शार्टकट अपनाना हमारे लिए जरुरी
हो गया और इस सब में हम इतना आगे बढ़ गए कि हमें यह पता ही नहीं चला कि हम अंदर से
कितने कमजोर हो गए। खासकर मानसिक स्तर पर। विश्व की सबसे बड़ी आबादी वाले देश को इतना
कमजोर होना चाहिए? वह देश जो आज वैश्विक स्तर
के हर मंच पर मजबूती से अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है। अपने काम से। व्यवहार से। नीतियों
से। कार्यक्रमो से। फैंसलों से। जिससे चहुंओर हमारी सराहना हो रही है। फिर हमारा पड़ोसी
मुल्क चीन जहां बूढ़ा होता जा रहा है वहीं भारत जवान हो रहा है। देश के लिए यह स्थिति
आगामी 30-35 वर्षों तक बनी रहेगी, जो हमारे लिए खुशी की बात
है। फिर हम तेजी से काम करते हुए सबसे अधिक विकसित राष्ट्रों की श्रेणी में आ खड़े
हुए हैं। दुनिया का हर देश आज हमारे साथ कदम से कदम मिलाकर चलना चाहता है। काम करना
चाहता है। जब स्थिति यह है तो हम क्यों भ्रष्ट होने का धब्बा हमारे माथे पर लगाएं।
कालाबाजारी करें। रिश्वतखोर बनें? क्यों? क्या हम हमारी युवा पीढ़ी को ऐसा बनाना चाहते हैं? ऐसा भारत देश देना चाहते हैं? जबकि युवा पीढ़ी किसी भी राष्ट्र
की मेरुदंड होती है। क्या इसे हम कमजोर कर दें? आखिर बीते लोकसभा चुनाव में श्री नरेंद्र मोदी जी को प्रधानमंत्री के रूप में हमने
इसीलिए चुना था न कि उनसे हमने देश से कालाधन समाप्त करने और विदेशों में जमा कालेधन
को देश में लाने का वादा लिया था। ऐसे में वे इस पर निर्णायक फैंसला लेते हैं और स्थिति
को ठीक करने के लिए कुछ दिन की मोहलत मांगते हैं तो फिर दिक्कत कहां है और क्यों है? इसे समझना होगा। क्या हम हमेशा शिकायत ही करते रहेंगे? समाधान की तरफ नहीं बढ़ेंगे? देश के प्रधानमंत्री ने नोटबंदी
कर कालेधन, भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी
के खिलाफ एक कदम आगे बढ़ाया है, जबकि इस सबके खिलाफ 125 करोड़ कदम आगे बढ़ाने की जरुरत है। ऐसे में देश-दुनिया और खासकर उन लोगों को जो
प्रधानमंत्री के इस कदम की आलोचना कर रहे हैं, उनके काम करने और निर्णय लेने के तरीके पर सवाल उठा रहे हैं, उन्हें शांत और धैर्य रखकर यह बता दीजिए कि यह बदलते और बदल गए भारत देश की ताकत
है। जिसके बूते प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी देश हित में, जनहित में एक के बाद एक फैंसले लेते जा रहे हैं। काम करते जा रहे हैं। इसीलिए वे
कहते हैं कि आप चलें या न चलें---देश चल पड़ा है।
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Wednesday, 23 November 2016
Monday, 31 October 2016
हम कामना करें म्हारा हरियाणा आगे बढ़े और बढ़ता ही जाए....
आज हरियाणा स्थापना के 50 साल पूरे हो रहे हैं। इन 50 सालों में हरियाणा ने कई उतार - चढ़ाव देखे हैं। आगे बढ़ने के तो कई मामलों में पीछे रह जाने के। जिनकी चर्चा हम आगे करेंगे। आज का यह दिन हरियाणवी होने का गर्व करने व हरियाणा को और आगे ले जाने का दिन है। ख़ुशी मनाने का दिन है। दिन इस बात का भी मनन करने का है कि हम हरियाणा को और बेहतर कैसे बना सकते हैं। उस स्थिति में जब कि हरियाणा ने वैश्विक स्तर पर लगभग प्रत्येक क्षेत्र में अव्वल रहने की अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी है। फिर चाहे वह क्षेत्र खेल का हो, शिक्षा का हो, विज्ञानं का हो, अंतरिक्ष का हो, उद्योग का हो। सभी में हरियाणा ने देश का परचम फहराया है। अपनी शुरुआत से ही हरियाणा मेहनतकश लोगों का प्रतिनिधित्व करता आया है। कृषि इस क्षेत्र की रीढ़ है तो कल कारखाने हरियाणा के विकास का चमकता हुआ चेहरा है। ऐसे में इस हरियाणा पर किसको गर्व नहीं होगा और कोई क्यों हरियाणा में नहीं रहना चाहेगा ? यहां के गबरू जवानों और पहलवानों की दुनिया भर में मिसाल दी जाती है। "देसां म्ह देस हरियाणा - जित दूध -दही का खाणा" इस प्रदेश की पहचान है। देश की सीमा पर खड़ा लगभग हर दसवां जवान हरियाणा से है। हरियाणा का प्रमुख शहर गुरुग्राम आज अपने विकास और दुनियाभर की सभी प्रमुख आईटी कंपनियों का मुख्यालय होने के कारण लघु भारत का रूप ले चूका है। गुरुग्राम ही वह शहर है जहाँ दिल्ली के बाद मेट्रो ने सबसे पहले दस्तक दी है। यहाँ की लाइफस्टाइल और विकास की बन रही योजनाएं प्रदेश के अन्य सभी छोटे-बड़े शहरों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही है। हरियाणा कई वर्षों बाद आज इस बात पर गर्व कर सकता है कि उसे भारतीय जनता पार्टी की टिकाऊ सरकार मिली है। ऐसा प्रदेश की जनता का भारतीय जनता पार्टी की रीति-नीति में अपने भरोसे के निवेश के चलते हो पाया है। हरियाणा आज आयाराम गयाराम की राजनीति को अलविदा कह चूका है जो कभी इस प्रदेश की राजनीति की पहचान हो गई थी। यहाँ यह कहना भी जरुरी हो जाता है कि कृषि प्रधान प्रदेश होने और सिर्फ दूध और बासमती चावल ही पैदा नहीं करता बल्कि देश में बनने वाली हर दूसरी कार हरियाणा में बनती है। देश का हर तीसरा टू व्हीलर और हर दूसरी क्रेन हरियाणा में बनती है। गुरुग्राम की आईटी, फरीदाबाद की लाइट इंजीनियरिंग, पानीपत के हैंडलूम, कम्बल, अम्बाला की साइंस उपकरण इंडस्ट्री और करनाल की डेयरी इंडस्ट्री इस प्रदेश की प्रमुख पहचान बताती है। इससे आगे थोड़ा सा हम सोचे तो "देसां म्ह देस हरियाणा - जित दूध दही का खाणा" जैसी पुरानी कहावत को बदलकर हरियाणा आज "देसां म्ह देस हरियाणा - जहाँ कदम-कदम पर कारखाना" में तब्दील हो रहा है। जिसके चलते आज दुनिया भर के देश हरियाणा में करोड़ों-अरबों रूपये का निवेश करने आ रहे हैं। जिससे हरियाणा देश का सबसे विकसित प्रदेश बन गया है। यही कारण है कि कृषि, खेल, आईटी, इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक निवेश में नई ऊंचाइयों को छूकर 50 साल में हरियाणा जवान हो गया है। खेल में क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय पहचान और एनसीआर में आईटी कंपनियों की विकास की रफ़्तार से प्रदेश ने नई उड़ान भरी है। कृषि डेयरी क्षेत्र की उपलब्धियां और राज्य में निवेशकों के रूझान ने नई ऊर्जा का संचार किया है। हरियाणा के पास आज गर्व करने के लिए सब कुछ है। जिनका नाम और उल्लेख करना शुरू करे तो लिखने को पन्ने कम पड़ जाएंगे। यह ऋषि मुनियों का प्रदेश है, पानीपत का युद्ध इसी प्रदेश में हुआ तो गीता का ज्ञान भगवान् श्री कृष्ण ने अर्जुन को कुरुक्षेत्र में दिया। महर्षि ऋषि की तपोभूमि इसी प्रदेश के नारनौल क्षेत्र में स्थित ढोसी के पहाड़ पर है। लेकिन इन सब उपलब्धियों पर गर्व करने के बावज़ूद हम जब महिलाओं और बच्चियों की स्थिति की ओर देखते है तो हमें इस क्षेत्र में बहुत अधिक काम करने की जरुरत है। फिर चाहे मामला उनको जन्म देने का हो, शिक्षा का हो, स्वास्थ्य का हो या उनके जीवन यापन का। हमें सभी क्षेत्रों में अधिक से अधिक काम करने की जरुरत है। मेरा यह स्पष्ट मानना है कि कोई भी देश हो या प्रदेश बिना आधी आबादी को साथ लिए आगे नहीं बढ़ सकता। ऐसे में आज एक नवंबर हरियाणा का दिन है। दिवस है। जिसे मनाने के लिए देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी सहित अन्य प्रदेशों के मुख्यमंत्री और भी बहुत अतिथि हरियाणा के गुरुग्राम में आ रहे हैं। इस अवसर पर सभी का स्वागत है, सत्कार है।
Tuesday, 25 October 2016
जनता के भरोसे के साथ आगे बढ़ रही है हरियाणा सरकार...
हरियाणा की ढाई करोड़ जनता को साथ लेकर और साथ चलकर सफलतापूर्वक दो साल पूरे कर आज तीसरे साल में प्रवेश कर रही प्रदेश की भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री को बधाई। इस सरकार में जनता ने जिस प्रकार अपने भरोसे का निवेश किया है उसके लिए जनता का आभार। जनता इस बात के लिए निश्चिन्त रहे कि सरकार उसके इस भरोसे को टूटने नहीं देगी। "हरियाणा एक - हरियाणवी एक" का जो सूत्र और नारा मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने दिया है वह हरियाणा प्रदेश की एकता, भाईचारा, सामाजिक सद्भाव, सौहार्द के साथ विकास के रास्ते पर एक होकर आगे बढ़ने का है जिसे प्रदेश की जनता ने स्वीकार किया है। यह हरियाणा की ताकत को दर्शाता है। इसमें कोई शक नहीं कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नेतृत्व में प्रदेश की भाजपा सरकार आगे बढ़ रही है, लेकिन अभी सरकार को बहुत से काम करने है जिनका वादा जनता से किया हुआ है। आने वाले तीन सालों में सरकार अपने वादों को न सिर्फ पूरा करेगी बल्कि उन समस्याओं का भी समाधान करेगी जिसने हरियाणा को आज भी अपनी गिरफ्त में ले रखा है। हरियाणा आज इस बात पर गर्व कर सकता है कि उसके प्रदेश में आज पढ़ी-लिखी पंचायतों का गठन हो गया है और सरकार का प्रत्येक काम पारदर्शिता के साथ हो रहा है। जिसकी कभी भी, कोई भी तसदीक कर सकता है। यही कारण है कि सरकार के दो साल के शासन में उस पर भ्रष्टाचार करने या काम में अनियमितता बरतने का आरोप लगा हो। यह सरकार की सफलता और विश्वसनीयता है। सरकार प्रदेश की समस्याओं का समाधान करने और विकास का चौतरफा माहौल बनाकर रोज़गार के नए-नए क्षेत्र विकसित करने का जो काम कर रही है उससे विदेशी निवेशक आज हरियाणा में निवेश करने के लिए लाइन में खड़े हैं और निवेश कर रहे हैं। जिससे प्रदेश के युवाओं को आने वाले समय में नौकरी और रोज़गार की व्यवस्था बनेगी। इस बीच पिछले कई वर्षों में ऐसा पहली बार हुआ है जब प्रदेश को एक टिकाऊ सरकार मिली है। इस सरकार को लेकर विपक्ष भले ही कंफ्यूज हो, लेकिन जनता कंफ्यूज नहीं है। वह भाजपा के साथ है, सरकार के साथ है। विपक्ष को आज इसी बात का मलाल है, वह हताश है। यह समस्या विपक्ष की है, भाजपा की नहीं, सरकार की नहीं। प्रदेश में ऐसा भी पहली बार हुआ है जब मुख्यमंत्री मनोहरलाल जी जनता से पूछ कर काम कर रहे हैं। इस संबंध में उनकी हर बात में एक ही सवाल होता है कि विकास के काम जनता की राय से किए जाए। मुख्यमंत्री की इस बात के लिए तारीफ करनी होगी कि आगामी एक नवम्बर को हरियाणा अपनी स्थापना के 50 साल पूरे करने पर स्वर्ण जयंती वर्ष मना रहा है। जिसका शुभारंभ करने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी खुद गुरुग्राम आ रहे हैं। मुख्यमंत्री की इस बारे में तारीफ़ इस बात की कि उन्होंने इस समारोह को मनाने के लिए सभी राजनीतिक दलों के राजनेता, सांसद, विधायक, पूर्व सांसद, पूर्व विधायक तक को आमन्त्रित किया है, एक किया है। क्योंकि यह समारोह हरियाणा का है। प्रदेश की महिलाएं आज इस बात पर गर्व कर सकती है कि उनके साथ हो रहे किसी भी शोषण, अन्याय और अत्याचार की शिकायत करने के लिए प्रदेश के प्रत्येक जिला मुख्यालय पर महिला पुलिस थाने खोल दिए गए है और आने वाले दिनों में ब्लॉक स्तर पर खोले जाने की योजना बन रही है। ऐसे में यह सरकार जनता की है, मुख्यमंत्री जनता के है, जनता अपने मुख्यमंत्री और सरकार से प्रदेश के हित में कोई भी बात कह सकती है, कर सकती है। सत्तारूढ़ भाजपा का अग्रिम संगठन भारतीय जनता युवा मोर्चा का प्रदेशाध्यक्ष होने के नाते मैं यह बात पूरे भरोसे के साथ कह सकता हूँ कि आने वाले समय में जनता के काम करने में और तेजी आएगी। जिससे प्रदेश विकास के रास्ते पर आगे बढ़ता जाएगा। एक बार पुनः मुख्यमंत्री और सरकार को शुभकामनाएं।
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Saturday, 22 October 2016
किंगमेकर होता है कार्यकर्ता
| गुरुग्राम के डीएलएफ फेज - II स्थित अपने कार्यालय पर भारतीय जनता युवा मोर्चा, हरियाणा के नवनियुक्त प्रदेश पदाधिकारी और जिलाध्यक्षों को संबोधित करते हुए। |
कोई भी राजनीतिक दल हो, संगठन हो, पार्टी हो। उसको नेतृत्व देने और नेता बनाने का काम कार्यकर्ता करते हैं। इसलिए नेतृत्व, नेता और पदाधिकारी बदलते रहते हैं लेकिन कार्यकर्ता अपने काम की वजह से हमेशा बनें रहते हैं। इसलिए कार्यकर्ताओं का महत्व, उपयोगिता और अनिवार्यता कभी कम नहीं होती। इसलिए कार्यकर्ताओं को गर्व होना चाहिए कि वे कार्यकर्ता है। खासकर भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं को तो यह गर्व की अनुभूति इस अर्थ में भी बड़ी और महत्वपूर्ण हो जाती है कि वे आज दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है। जो अपनी मेहनत, लगन और निष्ठा से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के रूप में देश को और श्री अमित शाह जी के रूप में भारतीय जनता पार्टी को नेतृत्व दे रहे हैं। ऐसे कार्यकर्ताओं को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं है। भारतीय जनता युवा मोर्चा इस पार्टी का अग्रिम संगठन है। हरियाणा में इसका नेतृत्व करने का दायित्व केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व ने मुझे सौंपा है। लेकिन मैं इस दायित्व का तभी सफलतापूर्वक क्रियान्वन कर पाऊंगा जब प्रत्येक कार्यकर्ता का समर्थन और सहयोग मुझे मिलेगा। मुझे ख़ुशी इस बात की है कि संगठन के कार्यकर्ताओं ने इस सब को देने और संगठन को आगे बढ़ाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है।
बीते सप्ताह हरियाणा में मोर्चा के सभी प्रदेश पदाधिकारी और जिलाध्यक्षों के नामों की घोषणा कर दी गई है। ऐसे सभी पदाधिकारी और जिलाध्यक्षों को काम करने की शक्ति और सहयोग कार्यकर्ताओं से मिलेगा ऐसी मैं उम्मीद करता हूँ। मैं इस बात को ऊपर कह चूका हूँ कि कार्यकर्ता किंगमेकर होता हैं। पदों पर काम करने वाले लोग बदलते रहते हैं। इसलिए कार्यकर्ताओं को निराश होने की जरुरत नहीं है वे अपना काम करते रहें। बस इस बात को ध्यान में रखे कि भारतीय जनता पार्टी और उसका अग्रिम संगठन भारतीय जनता युवा मोर्चा वह संगठन है जो अपने कार्यकर्ताओं को कभी निराश नहीं करता। ऐसा विश्वास कार्यकर्ताओं को अपने भीतर रखना होगा। इसमें धैर्य बनाए रखना बहुत जरुरी है क्योंकि धैर्य ही आदमी की सबसे बड़ी ताकत होती है। जो जितना धैर्य रखेगा उतना ही जीवन में प्राप्त करेगा। इसलिए आपको कब, कहां और किस भूमिका में रहना और रखना है यह काम संगठन के ऊपर छोड़ दें।
संगठन के नवनियुक्त सभी जिलाध्यक्षों से मैं कहना चाहता हूँ कि वे जल्द से जल्द अपनी कार्यकारिणी बनाकर प्रदेश नेतृत्व को सूचित करें और अपना काम शुरू कर दें। सभी जिलाध्यक्ष अपने कार्य को कार्यकर्ताओं की सलाह मशविरा से जितना अधिक करेंगे उतना ही उनके कार्य को मान्यता मिलेगी। सफलता मिलेगी। काम की उपयोगिता बढ़ेगी। यहां मैं एक बात और कहना चाहता हूँ कि युवाओं के प्रत्येक काम में विज़न दिखाई देना चाहिए। इसके लिए पदाधिकारियों को चाहिए कि वे पार्टी और संगठन के बड़े पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को काम करते हुए देखें कि ये लोग कैसे काम करते हैं। जब हम इस नज़रिए से चीज़ों को देखेंगे तो हमारी हर चीज़ और काम आसान होती चली जाएगी। इसलिए अपना काम शुरू कर दीजिए जिसकी पार्टी, संगठन, देश, प्रदेश और लोगों को जरुरत है।
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Monday, 10 October 2016
इस विजय दशमी पर लें आतंकवाद को खत्म करने का संकल्प।
आज विजयदशमी है। बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व। बुराई को जड़ मूल से खत्म करने के संकल्प का दिन। बुराई कोई भी हो। कहीं भी हो। यह हमारी जिम्मेदारी है। बदलते और आगे बढ़ते देश के लिए अब ऐसा करना जरुरी हो गया है। देश के नेतृत्व की दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति और सेना के पराक्रम की बदौलत हाल ही में हमने जिस प्रकार पीओके में आतंकी ठिकानों पर सफल सर्जिकल स्ट्राइक की है उससे हमारे देश का हौंसला बढ़ा है। इस स्ट्राइक ने हमें हर बुराई को खत्म करने की एक शक्ति दी है, सीख दी है। यूं तो समाज में आज भी कई प्रकार की बुराइयां व्याप्त है, लेकिन बढ़ते आतंकवाद ने जिस प्रकार पूरी मानव जाति को अपनी गिरफ्त में ले रखा है उसे जड़ मूल से खत्म करने की बात और संकल्प को लेकर हम इस विजय दशमी पर्व को मनाएं तो इससे बढ़कर हमारे लिए आज और कोई बात नहीं हो सकती।
इस आतंकवाद को खत्म करने की शुरुआत देश ने कर दी है। जिससे देश के फैंसला लेने की क्षमता में बढ़ोतरी हुई है और इसका असर नीचे तक देखने को मिला है। जरुरत इस बात की है कि हम इस बुराई को खत्म करने के लिए केवल सरकार और सेना पर ही पूरी तरह निर्भर ना हो जाएं। इस काम में हमें अपनी प्रभावी भूमिका को भी सुनिश्चित करना होगा। हमें यह देखना होगा कि हमारे आस-पास जहां पर हम हैं वहां आतंक जैसी कोई कार्रवाई तो नहीं चल रही है या अस्तित्व में तो नहीं आ रही है। इस आतंक का कोई भी रूप हो सकता है। ऐसे में हमें जरा भी यह लगे कि यह मानव जाति और शांति व्यवस्था के लिए हानिकारक हो सकता है तो इसकी सूचना तत्काल संबंधित एजेंसी और अधिकारियों को दें। इस काम में देश और समाज को एक होकर रहना होगा।
आतंकवाद से कोई एक जाति, धर्म, समुदाय, वर्ग के लोग ही पीड़ित नहीं हैं। पूरी मानव जाति के लिए यह जिस प्रकार खतरा बनकर सामने आया है उसे देखते हुए हमें खुद को इसके मुकाबले मज़बूत करना होगा। सबसे पहले इसके लिए हमें मानसिक स्तर पर मज़बूती दिखानी होगी और अपने अंदर यह भरोसा पैदा करना होगा कि हां हम इससे लड़ ही नहीं सकते, बल्कि इसे खत्म भी कर सकते हैं। हाल ही में पीओके में आतंकियों के खिलाफ हुई सफल सर्जिकल स्ट्राइक इसका प्रमाण है। हम इसके लिए हमारी सेना का बार - बार हौंसला बढ़ाते हैं उसका अभिनंदन करते हैं। निश्चित रूप से हमारी सेना ने भी आतंकवाद को खत्म करने का बीड़ा उठा लिया है। हम सेना के साथ हैं।
हमें यह संकल्प लेना होगा कि आज हम जिस सदी में और समय में जी रहे हैं उसमे आतंकवाद जैसी बुराई की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। यह सदी विकास की सदी है। आगे बढ़ने की सदी है। समस्याओं का समाधान करने की सदी है। अमन-चैन की सदी है। भारत आतंकवाद को खत्म करने के संकल्प के साथ जिस प्रकार आगे आया है उससे वैश्विक स्तर पर उसे मज़बूती मिली है, नेतृत्व करने की क्षमता सामने आई है। वैश्विक बिरादरी को अब यह बात समझनी होगी कि आतंकवाद - आतंकवाद होता है। यह अच्छा या बुरा नहीं होता। जिस प्रकार एक देश आतंक और आतंकवादियों की पनाहगाह बना हुआ है जिसे लेकर उसे वैश्विक बिरादरी में अलग थलग करने की कार्रवाई ने तेजी पकड़ी है, उसे देखते हुए अब वैश्विक बिरादरी के देशों को इस सम्बन्ध में अपने दोहरे मापदंडों को छोड़ना होगा। उन्हें तिलांजलि देनी होगी। विजय दशमी पर्व विजय का पर्व है। इस दिन हम आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ने और उसे खत्म करने का संकल्प कर आगे बढ़ें तो हम निश्चित रूप से इसमें सफलता प्राप्त कर लेंगे। ऐसे में वह दिन दूर नहीं होगा जब भारत आतंकवाद मुक्त देश बनने वाला वैश्विक मंच पर पहला देश होगा।
Friday, 7 October 2016
ऐसे खत्म कर सकते है गरीबी और बेरोज़गारी को ।
देश के युवा बेरोज़गारी से दो-चार हैं इसमें कोई शक नहीं है। बेरोज़गारी की यह समस्या आजकल में पैदा हुई नहीं है। कई दशकों से चली आ रही इस समस्या ने युवाओं को जिस कदर परेशान कर रखा है उससे उनके सामने रोज़गार का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। मौजूदा सरकार ने इस समस्या को दूर करने और युवाओं को हर क्षेत्र में रोज़गार दिलाने की व्यापक रणनीति और योजनाओं पर तेजी से काम करना शुरू कर दिया है। जिसका लाभ आने वाले दिनों में युवाओं को मिलेगा, यह तय है। सरकार ने इसके लिए मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, स्टेण्डअप इंडिया जैसी योजनाएं चलाई हैं और इसमें देशी-विदेशी निवेश की भी व्यवस्था की है, जिससे कि युवाओं को अधिक से अधिक नौकरी और रोज़गार दिया जा सके। युवा इन योजनाओं का महत्व और उपयोगिता समझते हुए जिस प्रकार काम करने के लिए आगे आ रहे हैं उससे देश को इन योजनाओं को अपने लक्ष्य की पूर्ती करने में मदद मिलेगी। योजनाएं सफल होंगी। सबका साथ - सबका विकास कार्यक्रम आगे बढ़ेगा। कहने का मतलब यह है कि ऐसा कर हम देश में गरीबी और बेरोज़गारी को एक साथ खत्म कर सकते है।
इससे पहले हमारे युवाओं को नौकरी और रोज़गार के अंतर को समझना होगा। युवाओं को यह तय करना होगा कि उन्हें नौकरी चाहिए या रोज़गार ? इसके लिए उन्हें अपनी योग्यता का प्रदर्शन करना होगा। सरकार दोनों के लिए तैयार है, लेकिन यहाँ एक बात बहुत स्पष्ट कहना चाहता हूँ कि नौकरी जहाँ एक युवा को फायदा पहुँचाएगी वहीँ, कोई भी युवा अपने कौशल से छोटा-मोटा काम शुरू कर स्वयं के अलावा अन्य युवा और जरूरतमंद लोगों को रोज़गार की व्यवस्था कर सकते है, जो देश और प्रदेश की आर्थिकी को सीधा फायदा पहुंचाती है। इसीलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने युवाओं के लिए स्टार्टअप और स्किल इंडिया कार्यक्रम की शुरुआत की है तो मेक इन इंडिया उन विदेशी निवेशकों के लिए है जो भारत में अपना सामान तैयार करे सकते है, जिससे देश के युवाओं को रोज़गार मिल सके। युवा इसमें अपना एक काम कर सकते है वह ये कि वे अपना ध्यान अधिक से अधिक कुटीर उद्योगों पर लगाएं और वहां यह काम करें जहाँ जरुरत है। ऐसा कर हम गांव की स्थिति में भी सुधार ला सकते है। पिछले कई वर्षों में यह देखने में आया है कि तेजी से समाप्त हुए हमारे हर प्रकार के कुटीर उद्योगों के बंद और खत्म के कारण गांव शहरों पर निर्भर हो गए है, जिसके कारण बेरोज़गारी की समस्या में तेजी से उछाल आया है।
यह बात यहीं खत्म नहीं होती है। अगर युवा कुटीर उद्योग लगाते है ये स्वयं का व्यवसाय शुरू करते है तो इसके लिए बैंकों से आवश्यक ऋण की भी व्यवस्था सरकार ने की है। जिससे युवाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने में किसी प्रकार की दिक्कत का सामना न करना पड़े। इससे पहले खासकर हरियाणा में युवाओं की स्किल को विकसित करने के लिए अब सरकार अपने कॉलेज - विश्विद्यालयों में, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में नए से नए व्यवसायिक पाठ्यक्रम ला रही है जिनका युवाओं को अधिक से अधिक फायदा उठाना चाहिए। यहां मैं यह स्पष्ट कर दूं कि नौकरी को लेकर युवाओं को बिल्कुल भी हतोत्साहित करने की मैं नहीं कह रहा हूँ। यह उनकी रुचि, इच्छाशक्ति और योग्यता पर निर्भर करता है। सरकार ने इसके लिए प्राइवेट सेक्टरों को युवाओं के कौशल को देखते हुए उन्हें उनके हिसाब से नौकरी देने की भी कह रखी है साथ ही विभिन्न क्षेत्रों के प्राइवेट सेक्टर अपने यहां नौकरियों का अधिक से अधिक सृजन करें जिससे देश और प्रदेश के युवाओं को लाभ मिल सके। युवा अगर सरकारी नौकरी में ही जाना चाहते हैं तो उन्हें इसके लिए कोई भी शॉर्टकट रास्ता अपनाने से बचना होगा। हालाँकि, केंद्र सरकार हो या हरियाणा सरकार दोनों ही जगह अब सरकारी नौकरी प्राप्त करने का कोई भी शॉर्टकट रास्ता खत्म कर दिया गया है। बहुत से लोगों को शायद यह पता नहीं है कि जब हम किसी भी काम में शॉर्टकट रास्ता अपनाते है तो उसका सीधा प्रभाव हमारी कार्य संस्कृति और काम के नतीजों पर पड़ता है। पिछले 70 साल से हम यह देखते आ रहे हैं, लेकिन अब चीज़ें बदली है, लोगों का मानस भी बदला है। लोग रोज़गार प्राप्त करने को अधिक महत्व देने लगे है। अगर हम ऐसा निरन्तर करेंगे तो मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, स्टेण्डअप इंडिया कार्यक्रमों को मज़बूत ही करेंगे। इससे युवाओं के बीच इनकी उपयोगिता और बढ़ेगी। इससे सबका विकास होगा। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का भी यही कहना है।
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Saturday, 1 October 2016
फैंसला आपको करना है कि आप गाँधी जी के किस विचार के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं ?
आज राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की 147 वीं जयंती है। राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी को हम बापू के नाम से भी जानते है और संबोधित भी करते हैं। गाँधी जी ने देश को आज़ाद कराने से लेकर आगे बढ़ने का विचार हमें दिया था। जो आज भी प्रासंगिक है। गाँधी जी का इस बारे में कोई एक विचार नहीं है। उन्होंने कई ऐसे विचार दिए जिनमें से किसी एक पर भी अमल कर हम काम करना शुरू कर दें तो वह हमें देश सेवा के लिए आगे ले जाता है। गाँधी जी ने हमें अहिंसा, शराब और किसी भी नशाखोरी से दूर रहना, स्वच्छता रखना जीवन में और अपने आसपास, स्वदेशी अपनाना, खादी पहनना, इत्यादि .... इत्यादि। इन सभी विचारों में से कोई एक विचार जिसके सबसे नज़दीक आप अपने आप को रखते है या पाते है बस उसी पर काम करना शुरू कर दें। यही देश की और समाज की सबसे बड़ी सेवा होगी। सही मायने में तो आज गाँधी जी के हर विचार पर तेजी से काम करने की जरुरत है। ऐसा हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बार-बार कहते हैं। वे यह बात यूँही नहीं कह रहे। वे गाँधी जी के हर विचार को देश के लिए एक विज़न के रूप में देखते हैं। आज जब पर्यटन हमारी बढ़ती इकॉनमी का प्रमुख क्षेत्र बनकर उभरा है तो हमें इसके लिए स्वच्छता के काम को हाथ में लेना होगा। ख़ुशी इस बात की है कि प्रधानमंत्री ने स्वच्छता के प्रति लोगों को जिस प्रकार जोड़ा है और नज़रिया बदलने में सफल हो रहे है उससे स्वच्छता के काम ने जनआंदोलन का रूप ले लिए है। यह सही है कि स्वच्छता का काम किसी समयसीमा में नहीं बांधा जा सकता। यह ताउम्र और लगातार काम की मांग करता है। देश के पढ़े-लिखे नौजवान जितना इस क्षेत्र में काम करेंगे उतना ही यह रोज़गार और स्वरोज़गार का रूप भी लेगा। स्वच्छता या सफाई के काम को किसी एक जाति या समुदाय का काम मानकर नहीं छोड़ सकते। अब इस सोच और नज़रिए का समय और जमाना गया। देश आगे बढ़ गया है। इन दिनों जिस तरह की एक सोच बनी है कि शौचालय का निर्माण करने से हम स्वच्छता और सफाई के उद्देश्य की पूर्ती कर लेंगे। यह गलत है। स्वच्छता से जुड़े जितने भी विषय और क्षेत्र है उन सब पर हमें एक विज़न मानकर काम करना होगा। जिसमें हर हाल में कूड़े का निस्तारण करना सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। हमारे देश में जितने भी छोटे-बड़े प्राकृतिक, ऐतिहासिक और पौराण्विक महत्व के पर्यटन स्थल है उन सब का भ्रमण कर वहां हम साफ़-सफाई की स्थिति का जायजा लेकर इस काम को आगे बढ़ा सकते है। ऐसा कर हम हमारे शहरों को भी साफ़ करने का काम करेंगे। इसमें हम एक काम और अच्छा कर सकते है वह यह कि सफाई के काम को हम पढ़ाई के दौरान पार्टटाइम के रूप में भी कर सकते है। अमेरिका में कॉलेज और विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं अपनी पढाई और जीवनयापन का खर्चा खुद उठाते हैं। क्या हमारे देश के नौजवान ऐसा नहीं कर सकते ? यकीन मानिए जब हम इस सोच के साथ इस काम को करना शुरू करेंगे तो न सिर्फ हम अपनी बेरोज़गारी को भी खत्म करेंगे बल्कि देश के आर्थिक कोष में भी हम अपना योगदान देंगे, जिसकी आज सबसे अधिक जरुरत है। इससे भी आगे बढ़कर यह काम अगर हम कर गए तो यह बदलते और नए भारत का राष्ट्रीय चरित्र भी बन जाएगा, जो जनसामान्य के लिए प्रेरणा का काम करेगा।
इसी प्रकार हम अपने जीवन में किसी भी प्रकार की हिंसा को स्थान न देते हुए गाँधी जी के अहिंसा के विचार को फैला सकते है, बढ़ा सकते है। जनसामान्य को बता सकते है कि गाँधी जी ने बिना हिंसा के देश के लोगों को आज़ादी के लिए एकत्रित कर अंग्रेजों को देश से खदेड़ने में जो सफलता प्राप्त की वैसा कर हम हमारे देश को समाज को हिंसा मुक्त नहीं कर सकते ? बिल्कुल हम ऐसा कर सकते है क्योंकि हिंसा हमारा स्वभाव नहीं है। सर्वधर्म सम्भाव के मार्ग पर चलने वाले लोग है हम। ऐसे ही हम शराब बंदी के क्षेत्र में काम कर सकते हैं। वहीँ स्वरोज़गार अपनाकर हम आत्मनिर्भर बन सकते हैं। फैंसला आपको करना है कि आप अब गाँधी जी के किस विचार के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं ?
Monday, 12 September 2016
बदलते भारत की ताकत ।
हरियाणा में पूर्ण बहुमत की भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद बीते दो साल में प्रदेश के युवाओं ने राजनीति को जिस तेजी से समझा है और उसमें अपनी जगह बनाई है, उससे एक बात साफ तौर पर कही जा सकती है वह यह कि बेवजह के मुद्दों पर लोगों को गुमराह कर वोट हथिया लेने वाली राजनीति आपके और हमारे बीच से खत्म हो रही है और उसकी जगह विकास की राजनीति ले रही है। इस राजनीति को हमने बीते लोकसभा और विधानसभा चुनाव में देखा है।
यह बदलाव की राजनीति है। जिसमें लोगों ने अपने भरोसे का निवेश किया है। भारतीय जनता पार्टी और सरकार के प्रति लोगों का यह भरोसा बना रहे। इस बात की जिम्मेदारी हम युवाओं की मतलब भारतीय जनता युवा मोर्चा की बनती है। ऐसा हम कैसे कर पाए तो इसका सीधा सा उत्तर है-हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की प्रेरणा से। जिन्होंने देश के लोगों खासकर युवाओं से एक ही बात कही, वह यह कि आप चलें या न चलें, देश चल पड़ा है-प्रदेश चल पड़ा है, और कमाल देखिए कि देश चल पड़ा। बदलाव के रास्ते पर। विकास के रास्ते पर। अपनी समस्याओं के समाधान के रास्ते पर। तकनीक के रास्ते पर। यह वह समय था जब प्रधानमंत्री ने देश को यूपीए के दस साल के शासन से उपजी गहरी निराशा के गर्त से देश को उबार लिया था। यही नहीं, देश को वैश्विक मंच पर शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में नए सिरे से स्थापित कर दिया। भारत का डिजीटल होना क्यों और कितना जरुरी है यह बता भी दिया और समझा भी दिया।
यह है बदलता भारत-बदलते भारत की ताकत।
हम युवाओं के काम करने से बनी भारत की आर्थिक ताकत की गूंज आज पूरे विश्व के कोने-कोने में सुनाई दे रही है तो हरियाणा विश्वभर के निवेशकों को विभिन्न क्षेत्रों में काम करने के लिए आकर्षित कर रहा है। जिससे प्रदेश के युवाओं को रोजगार मिल सके। हर प्रकार काम मिल सके। यह भाजपा सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों का कमाल है। जनहित में लिए जा रहे फैंसलों का कमाल है। पारदर्शी तरीके से काम कर रही सरकार की साफ-सुथरी सोच का कमाल है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल की हरियाणा एक-हरियाणवी एक सोच का कमाल है। जिसने हरियाणा प्रदेश को एकता और भाईचारे के सूत्र में और मजबूती से बांधने का काम किया है। हरियाणा और हरियाणा के सामाजिक सौहार्द को बनाए रखने के लिए। यह है हरियाणा का भाईचारा। जिसकी मिसाल पूरे देश में दी जाती है।
यह सब कुछ हमने अपने सामने भाजपा के पक्ष में खड़े होकर अपने लिए गए फैंसलों से होते हुए देखा है। यकीनन हम ऐसा कर पाए हैं। जब, हमने भाजपा के प्रति अपने अंदर के विश्वास को पहचाना। युवाओं का, आमजन का यह विश्वास आगे भी बना रहे। इसके लिए तय मानिए, भाजपा और भाजयुमो प्रदेश के किसी भी युवक को या जन को निराश नहीं होने देगा।
भाजपा-भाजयुमो
जिसने सत्ता बदल दी। राजनीति बदल दी। राजनीति करने वाले बदल दिए। सोच बदल दी। सोचने का नजरिया बदल दिया। युवाओं में आगे बढऩे की ललक जगा दी। विकास के मायने समझा दिए। युवाओं के विमर्श को केंद्र में ला दिया।
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Sunday, 4 September 2016
हमें हमारे लक्ष्य तक पंहुचा रहे सभी शिक्षकों के प्रति हम कृतज्ञ हैं
आज शिक्षक दिवस है। शिक्षकों के सम्मान का दिवस, शिक्षकों से आशीर्वाद लेने का भी दिवस है यह। शिक्षक दिवस हमें इस बात की भी ताकीद करता है कि हमें, हमारे देश और समाज को हमारे शिक्षकों की कितनी चिंता है ? साथ ही, यह दिवस शिक्षकों के भी आत्मचिंतन का अवसर है। जिसमें यह देखा और समझा जाता है कि शिक्षक अपने बच्चों को छात्रों को कितने उजाले में लेकर आया है। चिंतन और आगे बढ़ने की यह प्रक्रिया जब तक दोनों स्तरों पर नहीं होगी तब तक शिक्षक दिवस की सार्थकता भी सिद्ध नहीं होती है। यह हमें समझना होगा।
स्कूल, कॉलेज में पढ़ाने वाला व्यक्ति ही शिक्षक नहीं होता है। इससे पहले हमारी सबसे बड़ी शिक्षक हमारी मां भी होती है जिन्हें हम जीवन की सही पाठशाला कहते है। इस दिन अगर हम अपने शिक्षकों के साथ अपनी मां के प्रति भी अपनी कृतज्ञता जाहिर कर दें तो मां हमारी कितनी खुश हो जाएंगी। हम यह सोच भी नहीं सकते। उनकी नज़र में हमारा स्तर और समर्पण कितना बड़ा और ऊँचा हो जाएगा, यह मां से बढ़कर और कौन समझ सकता है। चाहे तो युवा ऐसा करके इस शिक्षक दिवस पर देख भी सकते हैं।
इसमें कोई दो राय नहीं है कि शिक्षक का हमारे जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में महत्व बढ़ गया है। चाहे वह क्षेत्र राजनीति का हो, खेल का हो, संगीत का हो, कैरियर का हो या फिर जीवन की विभिन्न प्रतियोगिताओं का हो। शिक्षक के बिना आज हम एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सकते। इन क्षेत्रों में ऐसे बहुत से शिक्षक मिल जाएंगे जो अपने शिष्यों को, युवाओं को उनके लक्ष्य तक पंहुचाने में जी जान से जुटे हुए है जिन्हें आजकल की भाषा में कोच, गुरु, ट्रेनर, कॉउंसलर भी कहा जाता है। कभी-कभी हमारे संगठन और संस्थाएं भी हमारे शिक्षक का काम करती है। जहां युवाओं के कैरियर का और भविष्य का बेहतर निर्माण किया जाता है। इससे भी आगे बढ़कर इन संस्थाओं और संगठनों में जो शिक्षक होते है वे अब नतीजे देने और अपने शिष्य से नतीजे लेने की दोहरी भूमिका में आ गए है। ऐसे शिक्षक और युवा हमारे समाज में, राजनीति में, खेलों में, सामाजिक क्षेत्रों में अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा का काम कर रहे हैं।
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसे सभी युवाओं को देश और समाज का एजेंडा तय करने वाली युवा शक्ति से परिभाषित किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की इसी युवा शक्ति से और ऊर्जा से आज सबसे अधिक प्रभावित है, उत्साहित है और देश को आगे ले जाने के प्रति आशान्वित है। प्रधानमंत्री देश में हो या वैश्विक स्तर के किसी भी मंच पर युवाओं को काम करने और आगे बढ़ने का जिस प्रकार वे सन्देश देते है, देश और दुनिया के सामने युवाओं का महत्व बताते है उससे वे स्वयं हम युवाओं के लिए एक शिक्षक की भूमिका में भी आ जाते है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब हम युवाओं से कहते हैं कि हमें क्या करना चाहिए और क्या नहीं। साथ ही, देश और समाज के प्रति किस प्रकार समर्पित हुआ जाता है तो वे पूरे देश के युवाओं के लिए एक प्रेरक व्यक्तित्व का काम करते है।
आज शिक्षक दिवस के दिन हम युवा अपने उन सभी शिक्षकों के प्रति कृतज्ञ है, आभारी है, नतमस्तक है जिन्होंने हमारी चिंता की और आज भी कर रहे है, इस बात की कि हम अपने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सबको साथ लेकर और सबके साथ किस प्रकार आगे बढ़ें। ऐसे सभी शिक्षकों का आशीर्वाद और शुभकामनाएं हमेशा हमारे साथ रही है और भविष्य में भी रहेंगी। ऐसा हम युवाओं को विश्वास है।
Location:
Gurgaon, Haryana 122001, India
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